आगरा यूनिवर्सिटी ने 150 कर्मचारियों को हटाने का लिया फैसला, संविदा पर की जाएगी भर्ती


आगरा,(उत्तर प्रदेश)। आगरा जिले के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कर्मचारी सोमवार को लामबंद हो गए। कामकाज ठप करके कर्मचारी विश्वविद्यालय प्रांगण में एकत्र हो गए और नारेबाजी की। कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन डेली बेसिस कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रहा है। कई वर्षों से विश्वविद्यालय में काम कर रहे करीब 150 कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। इधर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का समर्थन करते हुए अन्य कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। वहीं, विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि दैनिक कर्मचारियों को हटाकर उनके स्थान पर संविदाकर्मियों की भर्ती की जाएगी।
दरअसल, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया था कि विश्वविद्यायल में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगियों से अब काम नहीं लिया जाएगा। 29 नवंबर के बाद ऐसे कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी जाएगी। सोमवार को विश्वविद्यालय के प्रभारियों और संस्थानों के अध्यक्षों को इस संबंध में नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस जारी होने के बाद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आक्रोशित होकर कर्मचारी विभागों से बाहर आ गए और नारेबाजी करने लगे। इस दौरान तमाम फरियादी छात्र और अभिभावकों को बैरंग लौटना पड़ा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यायल में डेली बेसिस कर्मचारियों की संख्या करीब 150 है। विश्वविद्यालय में ऐसे कर्मचारी करीब 15-20 साल से काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि प्राइवेट एजेंसी को ठेका देकर कर्मचारियों के हितों का दोहन किया जा रहा है। कई वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को ऐसे हटा दिया जाएगा तो उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव संजीव कुमार सिंह का कहना है कि कार्य परिषद की बैठक में यह निर्णय हुआ है। विश्वविद्यालय में एजेंसी के माध्यम से संविदाकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। डेली बेसिस कर्मचारियों को हटाया जाएगा। हालांकि, एजेंसी के सामने इन कर्मचारियों के मामले को प्राथमिकता से रखा जाएगा।

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