गुरुग्राम में इमामों ने 20 स्थानों पर नमाज अदा करने पर जताई सहमति


गुरुग्राम। सार्वजनिक जगहों पर जुमे की नमाज के विरोध के मामले में मंगलवार को शहर में अलग-अलग जगहों पर नमाज अदा करने वाले 20 इमामों ने गुरुग्राम इमाम संगठन के बैनर तले उपायुक्त से मुलाकात की। प्रशासन द्वारा तीन नवंबर को 37 की बजाय 20 जगहों पर ही नमाज पढ़ने की अनुमति पर रजामंदी जताई। वहीं, इसे लेकर विरोध कर रहे समुदाय के ही कुछ लोगों को अमन नपसंद बताया। डीसी को ज्ञापन सौंप ऐसे लोगों लोगों के मनसूबे को सफल न होने देने के लिए नजर बनाए रखने की अपील की।
मंगलवार दोपहर जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग से गुरुग्राम इमाम संगठन में शामिल हुए सभी 20 इमाम मिलने पहुंचे। सभी ने एक स्वर में कहा कि विगत तीन नवंबर को प्रशासन, समुदायों के प्रतिनिधियों द्वारा जुमे की नमाज के लिए जिन 20 स्थानों पर रजामंदी हुई है, वह उन्हें सहर्ष स्वीकार हैं। वह इस मामले को लेकर अब और विवाद नहीं चाहते। संगठन के सदर मौलाना मोहम्मद शमून कासफी ने कहा कि शहर में हजारों लोग उनके पीछे नमाज पढ़ते हैं, इसलिए इस मसले पर उनका पक्ष महत्व रखता है। 
प्रशासन को इसी पर गौर करना चाहिए। नमाज के स्थानों को लेकर जो लोग विवाद पैदा करना चाहते हैं, उनको नमाज नहीं बल्कि अपनी राजनीति चमकाने की चिंता है। मौके पर मौजूद रहे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक खुर्शीद राजाका ने कहा कि गुरुग्राम इमाम संगठन की पहल सराहनीय है और जिला उपायुक्त ने भी इसकी प्रशंसा की है। इससे भाईचारा व शहर में अमन कायम होगा।
जुमे की नमाज के मसले पर सोमवार को जिला उपायुक्त से मिले गुुरुग्राम मुस्लिम काउंसिल के सदस्य प्रशासन से 2018 में तय सभी 37 स्थानों पर अनुमति बहाल करने की मांग कर चुकी है। कम जगहों पर राजी समुदाय के लोगों को काउंसिल द्वारा शहर से बाहरी बताया गया था, वहीं समुदाय की भावनाओं की कद्र न करने का आरोप लगाया गया था। काउंसिल के सदस्य अल्ताफ अहमद ने यह भी मांग की थी कि आबादी को देखते हुए शहर में नमाज के स्थलों को भविष्य में बढ़ाने पर विचार किया जाए न कि इन्हें घटाने पर।
भारत माता की जय के नारे लगाए
जिला उपायुक्त से मुलाकात के बाद बाहर आए इमाम काफी खुश नजर आए। उन्होंने भारत माता की जय व हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। वहीं, पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाए। इमामों ने कहा कि किसी भी धर्म की प्रार्थना से पहले शहर की शांति व अमन पहले जरूरी है। स्थलों को लेकर भविष्य में भी अगर कोई विवाद होगा तो दोनों तरफ के लोग आपस में मिलकर इसे निपटा लेंगे। यहां संगठन के नायब सदर कारी मोहम्मद आरिफ, सचिव मौलाना जुनैद मोईनी, सह सचिव मौलाना मोहम्मद अरशद मिफ्ताही, खजांची मौला मौलाना मोहम्मद ताहिर आदि मौजूद रहे।