गाजियाबाद में रेड मॉल होगा नीलाम, जीडीए का 225 करोड़ रुपये है बकाया, 200 दुकानदारों के सामने संकट


गाजियाबाद। गाजियाबाद में बकाया नहीं जमा करने के कारण 30 नवंबर को रेड मॉल की नीलामी होगी। न्यू बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से सटे हुए इस मॉल में 200 से अधिक दुकानदार हैं। जिनके सामने बड़ी मुसीबत आ गई है। एक तरफ मैसर्स सेलीब्रेशन सिटी (रेड मॉल) अपना बकाया करीब 225 करोड़ रुपये जीडीए में जमा नहीं करा रहा। वहीं दूसरी तरफ यहां पर फंसे निवेशक व दुकानदार इस बकाए को भरकर खुद मॉल का संचालन करने के लिए जिला प्रशासन और जीडीए को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन कंपनी एक्ट के कुछ पॉइंट के चलते ऐसा करना मुनासिब नहीं हो पा रहा। जिला प्रशासन ने जीडीए को पत्र लिखकर एनओसी मांगी है। फिलहाल जीडीए संपत्ति अनुभाग की टीम अपने बकाए का डिटेल तैयार करके दे रही है। जिससे उससे कम में इसे नीलाम न किया जाए। जीडीए अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि करीब 225 करोड़ रुपये बकाया है। इसकी डिटेल तैयार करके जिला प्रशासन को एक से दो दिन के अंदर भेज दिया जाएगा। उनकी तरफ से 30 नवंबर को इसे नीलाम किए जाने की तैयारी है। वहां फंसे दुकानदारों के सवाल पर उनका कहना है कि जीडीए की तरफ से एनओसी का जो पत्र जाएगा, उसमें निवेशकों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। हालांकि जीडीए अपर सचिव ने खुलकर इसके बारे में नहीं बताया कि किस तरह से निवेशकों का ध्यान रखा जाएगा। वहीं एसडीएम सदर विनय कुमार सिंह ने बताया कि जीडीए के बकाया को वसूलने के लिए रेड मॉल को 2018 के आसपास रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किया गया। 2019 में इसे सील भी कर दिया गया। इसके बाद भी बकाया पैसा नहीं जमा करवाया गया है। इसलिए अब इसे नीलाम किया जाएगा।
जीडीए ने करीब 55000 वर्ग मीटर एरिया को 2006 में मैसर्स सेलीब्रेशन सिटी को 100 करोड़ रुपये में बेचा था। इस पैसे को जीडीए में किश्त के माध्यम से जमा करना था। लेकिन सेलीब्रेशन सिटी के डायरेक्टर की तरफ से पैसा नहीं जमा करवाया गया। 2 बार जीडीए पैसे की वसूली को लेकर सील कर चुका है। फिर 2017 में इसकी आरसी जारी किए जाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया। जिला प्रशासन ने आरसी जारी की। एक डायरेक्टर को गिरफ्तार भी किया गया। 40 करोड़ रुपये देकर डायरेक्टर इस शर्त पर छूटा कि बाकी पैसा भी जमा करवा देगा। लेकिन अभी तक जिला प्रशासन के पास पैसा नहीं जमा करवाया गया।
जीडीए के अधिकारियों ने बताया कि वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) 2020 में रेड मॉल की तरफ से कंपनी के एक कर्मचारी ने आवेदन किया था। जीडीए ने 70 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस भी बनाकर भेजा था। लेकिन पैसा नहीं जमा करवाया गया। जिसकी वजह से ओटीएस को कैंसल कर दिया गया है। अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि पिछले तीन साल से अधिक समय हो गया है कि कंपनी में कोई डायरेक्टर नामित नहीं किया गया है।
बार-बार जब मॉल को सील किया जाता रहा तो आवंटियों ने जीडीए में आवेदन देकर कहा था कि यदि सेलिब्रेशन सिटी के निदेशक पैसा नहीं जमा करवा पा रहे हैं तो दुकानदारों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी जाए। दुकानदार खुद पैसा जुटाकर जीडीए का बकाया चुका देंगे। फिर वह इसका संचालन कर लेंगे। लेकिन इस पर उनकी जीडीए से बात नहीं बन सकी। कंपनी एक्ट के तहत कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही थी। जीडीए के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रॉजेक्ट में 200 से अधिक दुकानदार फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन को एनओसी के लिए जो पत्र भेजा जा रहा है उसमें इस बात का भी जिक्र किया गया है कि जीडीए का 225 करोड़ रुपये के अलावा निवेशकों के हित का भी नीलामी के दौरान ध्यान रखा जाए। जिससे नीलामी से रकम आने के बाद उन्हें रिफंड किया जा सके।
जीडीए के अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन के स्तर पर 30 नवंबर को होने वाली नीलामी यदि सफल नहीं होती है तो जीडीए आरसी को वापस लेकर खुद अपने स्तर पर इसकी नीलामी करेगा। इसमें दुकानदारों की सहमति ली जाएगी। साथ ही कंपनी एक्ट के तहत जो नीलामी का बेहतर तरीका होगा उस नियम के तहत ही इसकी नीलामी की जाएगी।
रेड मॉल वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष राकेश शर्मा बताते हैं कि इसमें 250 से अधिक निवेशक फंसे हुए हैं। किसी की एक दुकान है तो किसी की चार से अधिक दुकानें हैं। उन्होंने बताया कि 58 लाख रुपये उन्होंने खुद 2 दुकानों को लिया था। 35 हजार से अधिक किराया आता था। लेकिन सब बंद है। असोसिएशन के महासचिव अनिल शर्मा ने बताया कि इसमें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में केस रिजर्व है। इसके प्रमोटर संजीव जे एरन थे। उन्होंने राकेश जैन से फाइनेंस लेकर शेयर दे दिया। लेकिन अभी इसका कोई मालिक नहीं है। सभी निवेशक बुरी तरह से फंसे हुए हैं। कुछ लोगों ने अपनी पूरी पूंजी इसमें फंसा दी है। अब उनके हाथ कुछ भी नहीं है।