सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल बना ठगी करने वाले 4 विदेशी गिरफ्तार


  • नोएडा पुलिस ने चारों आरोपितों को दिल्ली से किया गिरफ्तार
  • पुलिस के मुताबिक, दर्जनों लोग इनके जाल में फंस चुके हैं
  • कब्जे से 3 लैपटॉप, 36 मोबाइल, साढ़े तीन लाख कैश बरामद
नोएडा ब्यूरो। सोशल साइट्स पर विदेशी युवक और युवतियों से दोस्ती महंगी भी पड़ सकती है। नोएडा पुलिस ने आंख, नाक, कान दर्द व अन्य बीमारियों का हवाला देकर मेडिकल वीजा पर भारत आकर ठगी करने वाले अफ्रीकी मूल के 4 नागरिकों के गिरफ्तार किया है। सेक्टर-20 थाना पुलिस की टीम ने दिल्ली से चार आरोपित गिरफ्तार किए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपित सोशल मीडिया पर यूके, यूएसए के निवासियों की प्रोफाइल की कॉपी कर अपनी फेक प्रोफाइल बनाते थे। इसके बाद भारतीय महिलाओं व युवकों से दोस्ती करते थे। फिर विदेश से मंहगा गिफ्ट भेजने की जानकारी देते थे। कुछ दिन बाद भारत में बैठी महिला या पुरुष के पास इनके गैंग का ही सदस्य कस्टम अधिकारी बनकर संपर्क करता था। गिफ्ट में करोड़ों की कीमत की जूलरी व कैश होने का झांसा देकर उसकी एक्साइज ड्यूटी व अन्य टैक्स के नाम पर लाखों रुपये अलग-अलग अकाउंट में यह ठग डलवा लेते थे। लालच में फंसा पीड़ित जब तक हकीकत से रूबरू हो पाता ये फेक प्रोफाइल डिलीट कर बैठ जाते थे।
एडीसीपी नोएडा रणविजय सिंह ने बताया कि इनके कब्जे से 3 लैपटॉप, 36 मोबाइल, चार इंटरनेट डोंगल, साढ़े तीन लाख रुपये कैश और चार पासपोर्ट बरामद हुए हैं। आरोपितों की पहचान नाइजीरिया निवासी अब्राहम लिकन, जस्टिन बिली, सिलवेस्ट्री और मार्टिन के रूप में हुई है। एडीसीपी के मुताबिक इन ठगों ने दर्जनों धोखाधड़ी की घटनाएं की हुई हैं।
विदेशी नागरिकों पर कार्रवाई के नियमों को पूरा करते हुए पुलिस जांच आगे बढ़ाएगी। आरोपित विदेशी महिला और पुरुष दोनों के फेक प्रोफाइल बनाते थे। फिर थोड़ा धनी लोगों में अपना सॉफ्ट टारगेट तलाश कर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाते थे। कुछ केस में तो विदेशी महिला बनकर इंडिया आकर मिलने तब तक सेटल होने के लिए मोटी रकम भेजने का झांसा देकर भी ठगी की हुई है। ठगी के कई और भी तरीके आरोपितों ने पहले की गई घटनाओं में अपनाए हुए हैं। यह दिल्ली के तिलक नगर इलाके में रहते थे।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि पिछले दिनों सेक्टर-20 थाना एरिया निवासी एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी की बुजुर्ग पत्नी के साथ 27.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। इसमें यह बात सामने आई कि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर कुछ दिन पहले एक फ्रेंड बना था। उसने खुद का नाम यूएस नेवी का कैप्टन एलेक्स बताया था। खुद को अकेला बताकर बुजुर्ग महिला से बातें शुरू की। भावनात्मक रूप से सहानुभूति हासिल कर महिला के बर्थडे पर एक गिफ्ट भेजने की जानकारी दी। फिर कस्टम से एक कॉल आई और गिफ्ट में करीब 2.5 करोड़ रुपये विदेशी कैश व करोड़ों की जूलरी होने की जानकारी दी। यह गिफ्ट एयरपोर्ट से पार्सल करवाने के नाम पर अलग-अलग 8 अकाउंट्स में रकम डलवाई गई। केस की जांच एसीपी-1 अंकिता शर्मा की अगुवाई में शुरू हुई। बैंक ट्रांजेक्शन व तकनीकी क्लू तलाशते हुए पुलिस इन चारों आरोपितों तक पहुंची।
तीन का वीजा हो चुका है एक्सपायर
एसीपी-1 अंकिता शर्मा ने बताया कि चारों आरोपित मेडिकल वीजा पर तीन-चार साल पहले भारत आए थे। इन्होंने आंख, नाक, कान दर्द व अन्य बीमारियों का हवाला देकर इलाज के लिए यह वीजा हासिल किया था। इनमें अब्राहम, जस्टिन बिली, सिलवेस्ट्री का वीजा बहुत पहले पूरा हो चुका है। मार्टिन जो सबसे आखिर में आया उसने आंख में दर्द का बहाना कर यह वीजा हासिल किया हुआ है। लेकिन इसके वीजा में भी टैंपरिंग का अंदेशा है। इसकी जांच करवाई जाएगी।
10 प्रतिशत कमीशन पर हासिल किए थे बैंक अकाउंट
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह ठग धोखाधड़ी कर रकम अलग-अलग भारतीय बैंक अकाउंट में मंगवाते थे। इनका तो बैंक अकाउंट खुल नहीं सकता था। इसलिए किसी ब्रोकर के जरिए रिक्शा वालों, कूड़ा उठाने वाले, मजदूरों के दस्तावेजों पर खुले बैंक अकाउंट्स हासिल किए थे। इनके डेबिट कार्ड भी पास रखते थे। ब्रोकर को बदले में इन अकाउंट में आने वाली ठगी की रकम का 10 प्रतिशत देना होता था। पुलिस पहले बैंक अकाउंट ट्रांजेक्शन के आधार पर मिले पते पर पहुंची। वहां खाताधारकों का हाल देखकर पुलिसकर्मी हैरान हुए। फिर कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए और साइबर सेल की मदद से पुलिस टीम इन आरोपितों तक गई। अभी अकाउंट कमीशन पर देने वाले ब्रोकर नहीं पकड़े गए हैं।
40 हजार रुपये किराए पर लिया था मकान
आरोपितों को दिल्ली से गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम ने बताया कि इस गैंग का मास्टर माइंड सिलवेस्टर है। यह भारत आने के बाद कई बार विदेशों को भी गया है। इन लोगों ने दिल्ली के तिलक नगर एरिया में 40 हजार रुपये महीने के किराए पर मकान लिया हुआ था। ठगी के लिए टारगेट तय करने उससे बात करने और कस्टम अधिकारी बनने के किरदार भी चारों में तय थे। जस्टिन बिली मेल प्रोफाइल बनाकर महिलाओं से बात करता था। इसी तरह कस्टम अधिकारी बनकर सिलवेस्टर बात करता था। इसी तरह मार्टिन महिलाओं की प्रोफाइल बनाकर चैट करता था। ठगी से आने वाली रकम आरोपित अपने देश को भेज देते थे।

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