हिंदी का समर्थन व आपातकाल का विरोध करने वाले 74 वर्षीय ब्रह्मेश्वर अब छेड़ेंगे दवा आंदोलन



नोएडा ब्यूरो। राज्य कर्मचारी बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल के 20 लाख से ज्यादा आश्रितों को दवा के लिए इंतजार का दर्द सहना पड़ रहा है। डॉक्टर के लिखे पर्चे को लेकर दवा के लिए लोग कई दिन तक डिस्पेंसरी के धक्के खा रहे हैं। औद्योगिक नगरी के लाखों लोगों की इस समस्या के समाधान के लिए 74 वर्षीय ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रा दवा आंदोलन छेड़ेंगे। बुधवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई के समक्ष इस अव्यवस्था को उठाकर उन्होंने 11 व 12 नवंबर को अस्पताल परिसर में सत्याग्रह की अनुमति मांगी है।
असुविधाओं और अव्यवस्थाओं के कारण लाखों आश्रितों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-57 सहित अन्य डिस्पेंसरी में दवा के इंतजार में मरीज और ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टर के लिखे पर्चे को कई दिनों से हाथ में लिए लोग दवाओं के लिए धक्के खा रहे हैं। ब्रह्मेश्वर ने बताया कि साल 2012 में उन्होंने कांग्रेस कार्यालय पर धरना देकर सर्वोच्च व उच्च न्यायालय के कामकाज में केवल अंग्रेजी के प्रयोग का विरोध किया था। इससे पहले 1975 में आपातकाल का विरोध भी किया था। अब दवा के लिए आंदोलन का समय आया है। उन्होंने कहा कि जब ईएसआईसी के नोएडा जैसे शहर के मॉडल अस्पताल में अव्यवस्थाओं की भरमार है। इलाज और दवा की लाइनों में लग-लगकर ही लोगों का मर्ज बढ़ जाता है। ईएसआईसी मुख्यालय के आदेशानुसार सेक्टर-24 अस्पताल में ही दवा उपलब्ध कराने के निर्देश हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन की मनमानी से मरीज-तीमारदार परेशान हैं। इन अव्यवस्थाओं के लिए अस्पताल के निदेशक डॉ. बलराज भंडार जिम्मेदार हैं। लगातार शिकायत के बाद भी व्यवस्था में सुधार न होने पर मजबूरन अब अस्पताल में सत्याग्रह का फैसला लिया है, जिससे सांसद और विधायक को भी अवगत कराया गया है।

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