दिल्ली में हाई कोर्ट समेत जिला अदालतों में सभी कोर्ट रूम के 'ताले' खुले, फिजिकल सुनवाई शुरू


दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को अपने सभी कोर्ट रूम के 'ताले' खोल दिए, पर कुछ बदलाव के साथ। यह बदलाव कोर्ट रूम में सुनवाई के तरीके से लेकर कोर्ट परिसर में जुटने वाली भीड़ तक में दिखा। वकील अब अपनी फुल वर्दी में वापस लौट आए हैं। वादियों की एंट्री पर लगी पाबंदी में फिलहाल आंशिक छूट ही है। जिला अदालतों में भी पूरी क्षमता के साथ फिजिकल सुनवाई की शुरुआत हो गई है। हाई कोर्ट ने ऑनलाइन सुनवाई के विकल्प को अभी भी खुला रखा है। मतलब, एक ही केस में कोई वकील फिजिकली पेश हो रहा है तो कोई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए। इसीलिए, कोर्ट रूम में मौजूद रहे बिना भी वहां होने वाली पूरी कार्यवाही को ऑनलाइन देखा जा सकता है। हाईब्रिड सुनवाई की इस सुविधा के चलते कोर्ट प्रशासन को भी गैर-जरूरी लोगों की भीड़ पर काबू रखने में कम दिक्कत होती दिखी। यह सुविधा हाई कोर्ट की लगभग सभी अदालतों में उपलब्ध है। सुनवाई के अलावा कोर्ट रूम और कोर्ट परिसर के सीटिंग अरेंजमेंट में भी कोविड-19 का प्रभाव दिख रहा है।
कोविड से पहले आम दिनों में जनहित मामलों की सुनवाई वाली चीफ जस्टिस की अदालत में वकीलों और वादियों की भीड़ इतनी ज्यादा होती कि कभी-कभी उसमें घुस तक मुश्किल हो जाता था। पर, अब कोर्टरूम से अधिकांश कुर्सियों को बाहर कर दिया गया है। गिनती की चेयर मौजूद हैं, जिसे इसे ढंग से लगाया गया है कि उन पर बैठने वालों के बीच कम से कम छह फुट की दूरी बनी रहे। बेंच और वकीलों के बीच पार्टिशन लगा दिए गए हैं। मास्क भी वकीलों के ड्रेस कोड का हिस्सा बन गया है। पहले, नाम के लिए लगे दिखने वाले माइक अब अपनी उपयोगिता साबित कर रहे हैं। एंट्री पॉइंट पर कड़ी चेकिंग है। कैंटीन में भी कोविड 19 से बचाव के नियमों के पालन को जरूरी है। हाई कोर्ट के लिए बनी एसओपी निचली अदालतों पर भी लागू है।