बेटे की हत्या के 16 साल बाद भी परिवार ने नहीं किया अंतिम संस्कार


गोरखपुर,(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक परिवार के अंदर बदले की आग 16 सालों बाद भी धधक रही है। यहां एक परिवार ने बेटे की मौत का बदला सिर्फ मौत की कसम खा रखी है। तभी तो जिस परिवार के युवक की जमीन विवाद में गोली मारकर हत्या हुई, उसके परिजनों ने अभी तक उसका अंतिम संस्कार तक नहीं किया। बल्कि जिस जमीन के लिए हत्या हुई, उसी जमीन में उसके शव को दफना कर समाधि बना दी है। परिजनों का कहना है कि जबतक हत्यारोपी को मौत की नींद नहीं सुला देंगे, तब तक वे अपने मृत बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इन 16 सालों से कुदरत से न्याय की आश लिए हुए अपनी बूढ़ी आंखों में आंसू लिए उसकी मां अपने बेटे की समाधि पर रोजाना फूल चढ़ाती हैं और अगरबत्ती जलाती है। यही नहीं बूढ़ी मां अपने बेटे की सामधि पर जाकर रोजाना उसे भोजन का भोग भी लगाती है।
गोरखपुर के झंगहा इलाके के ब्रम्हपुर पासी टोला निवासी विजयी पासी के चार बेटों में से तीसरे नंबर का बेटा राजा पासवान(20) की गोली मारकर हत्या जुलाई 2005 में उस समय हुई थी, जब वह सुबह करीब 8 बजे अपने खेत में काम कर रहा था। इस हत्या का आरोप गांव के ही दरोगा पासवान पर है। हालांकि पुलिस ने उसे घटना के एक महीने बाद गिरफ्तार तो किया, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर लॉकप से फरार हो गया। उसकी तलाश में जुटी पुलिस ने उसे दोबारा वर्ष 2008 में बड़ी मशक्कत से पंजाब के लुधियाना से पकड़ा और जेल भिजवा दिया। बावजूद इसके उसकी गिरफ्तारी से असंतुष्ट परिजनों ने मृत राजा पासवान का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार नहीं किया। बल्कि उसके शव को अपने घर के पास स्थित उस जमीन में ही दफना दिया जिस जमीन के विवाद को लेकर उसकी हत्या हुई थी। उस समय परिजनों का कहना था कि मौत का बदला उन्हें सिर्फ मौत ही चाहिए।
हत्या के आरोपी दरोगा पासवान को सीजीएम कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है। उसे 5 साल पहले ही गोरखपुर जेल से शिफ्ट करके बस्ती जेल भेज दिया गया है। लेकिन मृतक राजा के परिजनों को यह स्वीकार नहीं है। उनका कहना है कि भले ही कोर्ट से हत्या के बदले आजीवन कारावास की सजा हुई हो लेकिन उनके लिए इंसाफ तभी होगा जब उसे मौत मिलेगी। उनको ईश्वर पर भरोसा है, उनका मानना है कि एक न एक दिन भगवान उसे मौत जरूर देंगे। अगर फिर भी उनकी आस नहीं पूरी हुई तो वे खुद उसे मार देंगे और तब बेटे को कब्र से निकालकर मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार हिंदू रिवाज से करेंगे। कहा जाता है कि इसके लिए परिजनों ने एक गड़ासा भी रखा है। अगर आरोपी जेल से छूटकर आ जाएगा तो उसे मार दिया जाएगा।
झंगहा ब्रम्हपुर गांव के रहने वाले विजयी पासवान और उनकी पत्नी कलावती अपने बेटों राजू, राज कुमार, राजा, साजन और बेटी ममता के साथ दिल्ली में रहते थे। विजयी कप-प्लेट बनाने की एक फैक्ट्री में मुख्य कारीगर था। खेतों की बुआई व जुताई के समय में परिवार गांव आता था। विजयी और उसके परिवार वाले अपने पुरखों के समय से ही गांव के जमीदारों के बाग व खेतों की रखवाली और जोतने-बोने का काम करते थे। इसलिए जमीदारों ने कुछ जमीन जीवन-यापन के लिए विजयी व उसके परिवार को दी थी। ये बात गांव के ही दबंग दरोगा पासी को नागवार लग रही थी। क्योंकि वह विजयी का पट्टीदार था और जुताई वह खुद करना चाहता था।
परिजनों के अनुसार जून 2005 को राजा दिल्ली से अपने घर आया था। घर पर उसकी मां कलावती व बहन ही थी। 7 जुलाई 2005 की सुबह करीब 8 बजे राजा घर के पास स्थित खेत में काम कर रहा था। तभी गांव का ही दरोगा पासवान आया और तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। बदले की आग में जल रहे परिजनों ने उस समय आक्रोश में आकर बेटे का हिंदू रिवाज से दाह संस्कार व अंतिम संस्कार यानि ब्रम्हभोज नहीं किया बल्कि जिस जमीन के विवाद में हत्या हुई उसी जमीन में बेटे को दफनाकर उसकी समाधि बना दी।
मृतक की मां कलावती और पिता विजयी का कहना है कि उसके बेटे के हत्यारे को फांसी की सजा का इंतजार था। लेकिन वह नहीं हुआ। फिलहाल वह जेल में अपने कर्मों की सजा काट रहा है। लेकिन उन्हें भगवान पर विश्वास है। उनका कहना है कि भगवान खुद एक दिन उसे मौत दे देंगे। उसके मरने के बाद ही वे अपने बेटे का ब्रम्हभोज करेंगे। उनका कहना है कि जान का बदला जान ही होता है।
इलाके में चर्चा है कि मृतक के पिता विजयी ने गड़ासा तैयार कर रखा है कि जब भी आरोपी दरोगा जेल से आएगा वे उसे मार देंगे। वहीं घर पर वर्तमान में मृतक राजा के तीनों भाई व उनकी पत्नियां और उनके बच्चे रहते हैं। वहीं मृत राजा की मां और पिता रोज उस समाधि पर जाकर बेटे को सुबह-शाम भोजन-पानी देते हैं। उसके कब्र पर जमी घासों को साफ़ करते हैं और अपने बेटे की समाधि को टकटकी लगा कर देखते हैं। वहीं रोज शाम को समाधि पर दीपक भी जलाते हैं।

Popular posts from this blog

उत्तर पूर्वी जिला पुलिस ने ऑपरेशन अंकुश के तहत छेनू गैंग के चार बदमाशों को किया गिरफ्तार

जीटीबी एंक्लेव थाने में तैनात दिल्ली पुलिस की महिला एसआई ने लगा ली फांसी, पुलिस ने बचाई जान

रोटरी क्लब इंदिरपुरम परिवार के पूर्व प्रधान सुशील चांडक को ज़ोन २० का बनाया गया असिस्टंट गवर्नर