ओमिक्रोन संक्रमण से पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने जारी एसओपी, डीसीपी को बनाया नोडल अधिकारी


नई दिल्ली डेस्क। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन संक्रमण से पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने सभी तरह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को सभी 15 जिलों व यूनिटों के डीसीपी को इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए नोडल स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त कर दिया। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सभी डीसीपी को निर्देश दिए गए कि वे पहली व दूसरी लहर के दौरान पुलिसकर्मियों के इलाज के लिए रोहिणी व शाहदरा में बनाए गए 8 वेलनेस व 2 कोविड केयर सेंटरों को फिर से चालू कराकर वहां पहले की तरह जल्द मेडिकल इमरजेंसी सुविधाएं बहाल करा दें। उक्त सेंटरों में हर तरह की सुविधाएं हों ताकि किसी को कोई दिक्कत न आए। ओमिक्रोन से बचने के लिए संशोधित एसओपी (मानक आपरेटिंग प्रक्रिया) भी जारी कर दिया गया है, जिसे सभी को हर हाल में पालन करने को कहा गया है।
विशेष आयुक्त वेलफेयर शालिनी सिंह ने बुधवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों व इकाइयों के डीसीपी के साथ बैठक की। बैठक में ओमिक्रोन के सामुदायिक प्रसार के मद्देनजर समग्र तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य कल्याण पर पुलिस आयुक्त द्वारा जारी संशोधित एसओपी की सख्ती से पालन करने पर जोर दिया गया। बैठक में कहा गया कि संशोधित एसओपी अधिक लाभकारी है।इसमें किसी भी तरह की बीमारी से पीड़ित और चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कर्मियों के संपूर्ण स्वास्थ्य को शामिल किया गया है। जिलों के डीसीपी और यूनिटों के प्रमुखों को नोडल स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया है।
अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी एसीपी अनिल मित्तल के मुताबिक बैठक में निर्देश दिए गए कि नोडल स्वास्थ्य अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि इंस्पेक्टर या उनसे ऊपर के अधिकारी नियमित रूप से अस्पताल में भर्ती कर्मियों व उनके स्वजनों से तबतक मिलते रहेंगे जब तक वे ठीक नहीं हो जाते। बीमार कर्मियों के स्वास्थ्य पर जानकारी रखने के लिए कर्मियों व उनके स्वजनों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए भी संपर्क में रहें। जिला टीकाकरण केंद्रों को बदलने के लिए डीसी से संपर्क करें। सभी डीसीपी आक्सीजन सिलिंडर, कंसंट्रेटर, सेनिटाइजर, मास्क, दवा आदि के बारे में नियमित जायजा लेते रहें। सभी उपकरणों को तैयार स्थिति में रखें। वे संक्रमण की रोकथाम और इलाज में कर्मियों को परामर्श देने के लिए डॉक्टरों के संपर्क में रहें। बूस्टर डोज के लिए कर्मचारियों के डाटा को अपडेट करना शुरू कर दें। पुलिसकर्मियों के परिवार के सदस्यों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करते रहें। 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के उनके किशोरों को टीका के लिए काेविन एप पर पंजीकरण करने के लिए कहें।
संपदा अधिकारी को एप डाउनलोड करने और पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए पुलिस कालोनियों में हेल्प डेस्क स्थापित करने के लिए अनुरोध करें। सुबह और शाम की ब्रीफिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को आवश्यक सावधानियों जैसे मास्क पहनने, दूरी बनाकर रहने और नियमित स्वच्छता को लेकर जागरूक करते रहें। वीसी में थानों, कार्यालय परिसर और वाहनों को नियमित रूप से साफ करने को कहा गया। यह भी कहा गया कि आवश्यकता पड़ने पर कर्मियों को इम्युनिटी बूस्टर किट और कोविड सुरक्षा किट उपलब्ध कराएं। पहली व दूसरी लहर के दौरान कुछ सरकारी व निजी अस्पतालों में पुलिसकर्मियों के इलाज के लिए बेट आरक्षित कराए गए थे उसे फिर से कराने के निर्देश दिए गए। दिल्ली से बाहर रहने वाले कर्मियों के लिए क्वारंटाइन रूम की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया।
कोरोना की पहली लहर 2020 में 36 व दूसरी लहर 2021 में 43 पुलिसकर्मियों की कोरोना से मौत हो गई थी। उसे देखते हुए इस बार अत्यधिक सर्तकता बरती जा रही है।


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