पहनने के लिए उधार मांगी जैकेट, नहीं देने पर दोस्त ने कर दी हत्या


नयी दिल्ली। 25 दिसंबर से लापता युवक की हत्या कर दी गई। आरोपियों ने शव को नाले में फेंक दिया और फरार हो गए। 5 राज्यों में 4500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए मंगोलपुरी पुलिस युवक को ढूंढते हुए उसके दोस्तों के पास अहमदाबाद पहुंच गई। पुलिस जिसे गुमशुदा मानकर चल रही थी, पूछताछ में हत्या की बात सामने आई। पुलिस ने तीन आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंगोलपुरी निवासी 19 वर्षीय राजकुमार, 19 वर्षीय जावेद और 19 वर्षीय हर्षू के तौर पर हुई। सभी अलग-अलग कंपनियों में काम करते थे।
डीसीपी परविंदर के मुताबिक, 26 दिसंबर को मंगोलपुरी निवासी रेशमा ने बताया कि उनका बेटा 18 वर्षीय संतोष लापता है। इस संबंध में पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई। सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, आसपास एरिया की तलाशी ली गई। संतोष का कोई सुराग नहीं मिला।
28 दिसंबर को पीड़ित परिजनों ने बताया कि उनके बेटे को प्रिंस, हर्षू, पारस और जावेद (एक ही इलाके के निवासी) बुलाकर ले गए थे। शक जताया कि उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया है, क्योंकि तभी से ये लोग फरार हैं। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया। जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी यह कहकर घर से निकले थे कि वे रिश्तेदार से मिलने कानपुर जा रहे हैं। इसके बाद एक टीम वहां पहुंची। पता चला कि वे कानपुर नहीं पहुंचे हैं।
इसके बाद, टीम को सर्विलांस से एक संदिग्ध के गया में होने का पता चला। एक टीम वहां भेजी गई। वह तब तक गया से जा चुका था। पता चला कि वह अपने स्थानीय दोस्त के साथ गया से निकला है। दोनों की लोकेशन आगरा की मिली। उन्हें रोकने के लिए एक टीम को तुरंत आगरा के लिए रवाना किया गया, लेकिन संदिग्ध राजस्थान और फिर गुजरात की ओर बढ़ गए। एक टीम को तुरंत रूट पर चलने के लिए कहा गया। टीम ने रेल रूट को ट्रेस किया। आखिरकार गुजरात के गांधीधाम से तीनों आरोपियों को पकड़कर दिल्ली लाया गया। आरेापियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
पूछताछ में पता चला कि संतोष के पास एक अच्छी जैकेट थी। 25 दिसंबर की दोपहर राजकुमार ने संतोष को कुछ समय के लिए जैकेट उधार देने के लिए कहा था। वे करीबी दोस्त थे, लेकिन पीड़ित ने इनकार कर दिया। ताने भी कसे। उसने उसे और उसके दोस्तों को भी पीटा। अपमान का बदला लेने के लिए राजकुमार, हर्षू और जावेद ने संतोष को सबक सिखाने का फैसला किया। उसी दिन शाम को उन्होंने उसे बुलाया। पार्टी करने के बहाने अपने साथ ले गए। उन्होंने शराब पी। संतोष नशे में धुत हो गया तो पहले उसके पैर पर, फिर पेट और गर्दन पर वार किया और शव को नाले में फेंक दिया।

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